ARCHIVES
VOL. 8, ISSUE 1 (2023)
रविन्द्रनाथ टैगोर का शैक्षिक दर्शन तथा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इसकी प्रासंगिकता
Authors
संजीव कुमार चौहान, डॉ० योगेश्वर प्रसाद शर्मा
Abstract
अति प्राचीन काल से भारत सिद्ध पुरुषों एवं युग निर्माताओं का देश रहा है। रविन्द्रनाथ टैगोर भी उन्हीं लोगों में से एक थे। रविन्द्रनाथ टैगोर का जीवन आधुनिक भारत के पूरे युग में फैला हुआ है। उनके व्यक्तित्व विकास में नवजागरण की मुख्य बातें पाई जाती है। इस प्रकार के अद्वितीय व्यक्तित्व के कारण रविन्द्रनाथ टैगोर अपने को एक महान कवि, साहित्यकार, समाज सुधारक और दार्शनिक के रूप में सीमित ना रख सके। बल्कि अपने महान विचारों के द्वारा जन समुदाय को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने के लिए वे एक महान शिक्षा शास्त्री व शिक्षा विशेषज्ञ के रूप में हमारे लिए वरदान सिद्ध हुए। शिक्षाशास्त्र में उनकी देनों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि वे एक उच्च कोटि के शिक्षा शास्त्री थे, यद्यपि उन्होंने अध्यापन का पेशा कभी नहीं ग्रहण किया। उनकी प्रज्ञा इतनी प्रबल थी कि वे अपनी बुद्धि के सहारे किसी विषय की तह में बैठ सकते थे। किसी पदार्थ की मूल प्रकृति एवं उसके वास्तविक स्वरूप का पता लगा लेने में ये सिद्धहस्त थे। उनकी बुद्धि का ही यह कमाल था कि जिस समय भारत शिक्षा के क्षेत्र में पश्चिम का अनुकरण करने में लगा हुआ था, उस समय वे आधुनिक भारतीय जीवन के अनुकूल एक शिक्षा प्रणाली की खोज कर रहे थे। जिस समय भारतीय विश्वविद्यालयों में पश्चिमी सिद्धान्तों को दिव्य मानकर आत्मसात् किया जा रहा था उस समय वे शिक्षा के नये सिद्धान्तों का पता लगाने में जुटे हुए थे। रविन्द्रनाथ टैगोर समाज का उन्नयन करना चाहते थे और अतीत भारत की आत्मा में देखना चाहते थे। वे समाज को प्राकृतिक नियमों पर आधारित तो करना चाहते थे किन्तु आधुनिक वैज्ञानिकता एवं अतीत की धार्मिकता एवं नैतिकता से विहीन समाज को अच्छा नहीं समझते थे।
Download
Pages:8-10
How to cite this article:
संजीव कुमार चौहान, डॉ० योगेश्वर प्रसाद शर्मा "रविन्द्रनाथ टैगोर का शैक्षिक दर्शन तथा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इसकी प्रासंगिकता". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 8, Issue 1, 2023, Pages 8-10
Pdf, Certificate, Cover Page, Index Page, Editorial Page, Accept Letter
Please enter the email address corresponding to this article submission.
