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VOL. 7, ISSUE 2 (2022)
विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में पाठ्य सहगामी क्रियाओं का महत्व और इनका क्रियान्वयन
Authors
जितेंद्र कुमार
Abstract
शिक्षा द्वारा नागरिकों में ऐसे गुणों का विकास किया जाता है, जिससे समाज के लिए वांछनीय योग्यताएं विकसित की जा सकें। पाठ्य सहगामी क्रियाएँ/गतिविधियाँ विद्यार्थियों के मौलिक चिंतन को जाग्रत करने के साथ ही जीवन में नयापन लाती हैं, जिससे विद्यार्थियों में एक नई उमंग और उत्साह का संचार होता है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पाठ्य सहगामी क्रियाओं को भलीभाँति पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। भारत के विभिन्न शिक्षा आयोगों ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पाठ्य सहगामी क्रियाओं को महत्व दिया। जिससे उनमें मानसिक विकास, शारीरिक विकास, भावनात्मक विकास, टीम भावना का विकास, नैतिक विकास, नेतृत्व विकास, साहसिक क्षमताओं का विकास, अनुशासन की आदत का विकास, चारित्रिक विकास, आत्मविश्वास का विकास, सृजनात्मक क्षमताओं का विकास, राष्ट्र सेवा की भावना का विकास, अभिप्रेरणा का विकास, राष्ट्रीय एकता का विकास, सामाजिक विकास, उत्तरदायित्व की भावना का विकास, सांस्कृतिक विकास, नागरिकता का विकास आदि। इनका क्रियांवयन इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देता है। विभिन्न स्तरों पर क्रियान्वयन हेतु प्रशिक्षित और इच्छापूर्ण व्यक्तित्व को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है जिससे उद्देश्यों की प्राप्ति उत्कृष्ट रूप में संभव हो सके।
Pages:91-94
How to cite this article:
जितेंद्र कुमार "विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में पाठ्य सहगामी क्रियाओं का महत्व और इनका क्रियान्वयन". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 7, Issue 2, 2022, Pages 91-94
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