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VOL. 6, ISSUE 5 (2021)
गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ की कविताओं में केंद्रित समाज
Authors
डॉ. प्रवीण देशमुख
Abstract
विशेष रूप से हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल में जब हम प्रगतिशील रचनाकारों को लेकर चर्चा करते है तो साहित्यकार मुक्तिबोध इन रचनाकारों की पंक्ति में विराजित दिखाई देते है I रचनाकार मुक्तिबोध के साहित्य का प्रमुख केंद्रबिंदु समाज रहा है I मुक्तिबोध की लगभग सभी कविताएँ समाज में स्थापित ऐसे लोग जो दिखाई कुछ देते है, और कार्य कुछ और करते है I मुक्तिबोध ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में प्रगतिशील जीवन मूल्यों की संकल्पना की बात की I मुक्तिबोध हमें अपने साहित्य में सौंदर्य चेतना और जीवनानुभव के अंत: संबंधो को प्रमुखता से स्पष्ट करते दिखाई देते हैं I मुक्तिबोध की लगभग सभी कविताएँ समाज में स्थापित ऐसे लोग जो दिखाई कुछ देते है, और कार्य कुछ और करते है I मुक्तिबोध ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में प्रगतिशील जीवन मूल्यों की संकल्पना की बात की I मुक्तिबोध उन साहित्यकारों में से एक रहे है, जिन्होंने स्वयं की चिंता छोड़ समाज तथा साहित्य की चिंता की है I मुक्तिबोध का सम्पूर्ण जीवन संघर्षों से पूर्ण रहा है I एक जनवादी रचनाकार के रूप में मुक्तिबोध ने अपना साहित्य सृजित किया I
Pages:19-24
How to cite this article:
डॉ. प्रवीण देशमुख "गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ की कविताओं में केंद्रित समाज ". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 6, Issue 5, 2021, Pages 19-24
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