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VOL. 6, ISSUE 4 (2021)
वर्तमान समय में शांति शिक्षा की आवश्यकता
Authors
Dr. Subhash Singh
Abstract
भारतीय शिक्षा का इतिहास अति प्राचीन है। वैदिक काल से लेकर आज तक भारतीय शिक्षा निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर रही है। समय के साथ परिवर्तित हो रही सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप शिक्षा के स्वरूप में भी परिवर्तन तथा संशोधन किया जाता रहा है। वर्तमान में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन तक ही सीमित नहीं रहा वरन् शिक्षा राष्ट्रीय विकास की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है। वर्तमान में शिक्षा का सर्वप्रमुख कार्य मानव संसाधनों का यथोचित् विकास करना है। इस दृष्टि से देखा जाए तो आज शिक्षा के द्वार पर अनेक नूतन प्रवृत्तियाँ दस्तक दे रही है, जिन्हें शीघ्र आत्मसात् करना परम आवश्यक हो गया है। वस्तुतः परिवर्तन की माँग के अनुरूप आधुनिक, प्रगतिशील तथा विश्वव्यापी दृष्टिकोण अपनाकर ही भारतीय शिक्षा अपने स्वरूप गुणवत्ता और अस्तित्व को बनाये रखने में सफल हो सकती है। इस परिप्रेक्ष्य में मानवाधिकार शिक्षा, शान्ति शिक्षा, समावेशी शिक्षा, महिला सशक्तिकरण हेतु शिक्षा, निजीकरण व वैश्वीकरण के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा आदि अनेकानेक नूतन प्रकरण शिक्षा के क्षेत्र में चर्चित मुद्दे बन गए है। इस परिप्रेक्ष्य में भारतीय शिक्षा प्रणाली में आ रही नूतन प्रवृत्तियों व नवाचारों का स्वागत करना स्वाभाविक है। इधर कुछ समय से मानव समाज में बढ़ती अशान्ति, विवाद व कलह के फलस्वरूप विगत कुछ समय से शान्ति शिक्षा की माँग बढ़ रही है। निःसन्देह शिक्षा के माध्यम से शान्ति स्थापित करने के लक्ष्य की पूर्ति सरलता से की जा सकती है। आज बच्चों को ऐसी शिक्षा देने की आवश्यकता है जिससे उसमें आतंकवाद, हिंसा, विद्वेष, जैसी अवांछनीय घटनाओं के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हो तथा परस्पर सौहार्द, सह-आस्तित्व, सहयोग, सहिष्णुता भाईचारा जैसे सकारात्मक गुण विकसित हो सके। संक्षेप में शान्ति शिक्षा नैतिक विकास के साथ उन मूल्यों और दृष्टिकोण के पोषण पर बल देती है जो प्रकृति और मानव जगत् के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए आवश्यक है।
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Pages:29-33
How to cite this article:
Dr. Subhash Singh "वर्तमान समय में शांति शिक्षा की आवश्यकता ". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 6, Issue 4, 2021, Pages 29-33
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