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VOL. 5, ISSUE 4 (2020)
अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षाः सुरक्षा परिषद् की भूमिका
Authors
आनन्द अरोड़ा
Abstract
संयुक्त राष्ट्र संघ ने अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा की ‘प्राथमिक जिम्मेदारी’ व व्यापक शक्तियाँ सुरक्षा परिषद् को प्रदान की। सुरक्षा परिषद् संयुक्त राष्ट्र संघ के 6 अंगो में से एक प्रमुख अंग है। सुरक्षा परिषद् ने शान्ति भंग होने या शान्ति भंग होने की आशंका उत्पन्न होने पर शान्ति स्थापित करने हेतु कई महत्वपूर्ण कार्यवाहियाँ करके अपना योगदान प्रदान किया। हालांकि कई मामलों में इस संस्था ने प्रभावशाली ढंग से कार्यवाही करके सफलता प्राप्त की लेकिन सफलता के साथ-साथ सुरक्षा परिषद् को असफलताएं भी प्राप्त हुई। असफलता का मुख्य कारण महाशक्तियों में आपसी संघर्ष का होना एवं सहयोग का अभाव तथा स्थायी सदस्य द्वारा बार-बार निषेाधिकार का प्रयोग करना है। वर्तमान मे सुरक्षा परिषद् में व्याप्त दोषों एवं दुर्बलताओं को देखते हुए अधिकांश राष्ट्रों ने इसके पुर्नगठन एंव विस्तार की मांग करना प्रारम्भ किया।
अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा बनाये रखने हेतु सुरक्षा परिषद् किस प्रकार अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकती हैं तथा कैसे एक ऐसी विश्व व्यवस्था स्थापित करने में सफल हो सकती हैं, जिससे कोई राष्ट्र दूसरे राष्ट्र के मामलों में अनुचित हस्तक्षेप करने का साहस न कर सके। इस हेतु सुरक्षा परिषद् में मतदान की व्यवस्था मे सुधार, सदस्यता सम्बन्धी प्रावधानों में सुधार, भारत को स्थाई सदस्य बनाया जाना, आचार संहिता का निर्माण, शान्ति कायम रखने हेतु कोष की स्थापना विशेष करार का होना तथा स्थाई सदस्यों की मानसिकता में स्वस्थ परिवर्तन का होना आवश्यक है। उपर्युक्त आदि कारणोंसे इस विषय पर शोध महत्वपूर्ण हो जाता है।
Pages:32-35
How to cite this article:
आनन्द अरोड़ा "अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षाः सुरक्षा परिषद् की भूमिका". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 5, Issue 4, 2020, Pages 32-35
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