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VOL. 5, ISSUE 1 (2020)
छात्राध्यापकों के समायोजन की उपयोगिता: विद्यालय प्रशिक्षुता कार्यक्रम के सन्दर्भ में
Authors
यासमीन अशरफ
Abstract
वस्तुतः जन्म से मृत्यु तक की सम्पूर्ण अवधि में व्यक्ति शारीरिक तथा मानसिक रूप से स्वस्थ रहकर वातावरण के साथ संयोजन के लिए निरंतर प्रयासरत रहता है | मानसिक उलझनों से ग्रस्त व्यक्ति प्रायः अपने दैनिक जीवन की विभिन्न परिस्थितियों से उचित समायोजन करने में कठिनाई का अनुभव करता है | निःसंदेह व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ मस्तिष्क का होना अत्यंत आवश्यक है | समायोजन शब्द वस्तुतः दो शब्दों का योग है | सम + आयोजन, सम का तात्पर्य भली-भांति अथवा समान रूप से है जबकि आयोजन का अर्थ व्यवस्था करने से होता है अतएव समायोजन शब्द का अर्थ अच्छी तरह से व्यवस्था करने से है | समायोजन परिस्थितियों को अनुकूल बनाने की वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति की आवश्यकतायें तो पूरी हो जायें परन्तु उसे कोई कुंठा तनाव या मानसिक द्वंद्व उत्पन्न न होने पाएं | प्रस्तुत पत्र में शैक्षिक समयोजन के विषय में विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है, विशेषकर छात्राध्यापकों के समायोजन को बताने का प्रयास किया गया है ।
Pages:40-42
How to cite this article:
यासमीन अशरफ "छात्राध्यापकों के समायोजन की उपयोगिता: विद्यालय प्रशिक्षुता कार्यक्रम के सन्दर्भ में". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 5, Issue 1, 2020, Pages 40-42
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