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VOL. 4, ISSUE 3 (2019)
ग्रामीण एवं शहरी सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्तर के विद्यार्थियों पर योग शिक्षा के प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन
Authors
डाॅ0 श्याम सुंदर पाल
Abstract
19वी सदी के अंन्तिम दशको मे किशोरावस्था का अध्ययन वैज्ञानिक शोध व जानकारी का विषय बना है क्योकि किसी भी राष्ट्र की जनसंख्या का एक भाग किशोर-किशोरियो द्वारा निर्मित होता है। अतः ये ही राष्ट्र के भविष्य निर्माता व कर्णधार है। देश की प्रगति व विकास न केवल उस देश के किशोर-किशोरियो के सर्वागीय विकास अपितु उनकी ऊर्जा क्षमता व शक्ति के सही दिशा-निर्देशन पर निर्भर करते है। इस संदर्भ मे श्री राजीव गाँधी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) की भूमिका मे कहा है कि- ‘‘किशोरवय बालक एक बेशकीमती सम्पदा है अमूल्य संसाधन है। जरूरत इस बात की है कि इन बालको की परवरिश गतिशील व संवेदनशील हो तथा सावधानी से की जाये।
Pages:58-64
How to cite this article:
डाॅ0 श्याम सुंदर पाल "ग्रामीण एवं शहरी सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्तर के विद्यार्थियों पर योग शिक्षा के प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 4, Issue 3, 2019, Pages 58-64
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