ARCHIVES
VOL. 3, ISSUE 4 (2018)
सौंदर्य का स्वरूप : भारतीय और पाश्चात्य मतों का अध्ययन
Authors
डॉ. अमिय कुमार साहु
Abstract
यह शोध-लेख, सौन्दर्य और उसके स्वरूप पर आधारित है । साधारणतः हम सौन्दर्य को वस्तु और प्राणी के बाहरी रूप का विषय मान लेते हैं । किसी भी चीज और प्राणी की सुंदरता उसके रंग, उसकी बनावट में निहित मान लिया जाता है । अगर हम सिर्फ बाह्य रूप को ही सौन्दर्य का मानदंड मान लें तो यह तर्क संगत नहीं होगा। क्योंकि कोई भी व्यक्ति या प्राणी हर समय हर देश-काल-परिस्थिति में सुंदर लगता नहीं है । देश-काल के अनुसार सौन्दर्य की परिभाषा बदलती रहती है । चाहे वह पप्राणी-जगत हो या कला-जगत;इसके बाह्य और आंतरिक रूपों में सौन्दर्य के अवस्थान को लेकर पुराने जमाने से लेकर आज तक बहुत सारे चिंतकों ने इस पर अपना मत प्रकट किया है । इन मतों का अध्ययन करना और एक नतीजे तक पहुँचना इस शोध-लेख का उद्देश्य है ।
Pages:48-51
How to cite this article:
डॉ. अमिय कुमार साहु "सौंदर्य का स्वरूप : भारतीय और पाश्चात्य मतों का अध्ययन". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 3, Issue 4, 2018, Pages 48-51
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.
