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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
आधुनिक संदर्भ में कबीर की प्रासंगिकता : एक अध्ययन
Authors
रेणु
Abstract
कबीर हिन्दी के महान कवियों में से एक है। उतर भारत की हिन्दी भाषी जनता में तुलसी के उपरान्त यदि किसी अन्य कवि का काव्य लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ हैं, तो वह कबीर ही हैं। कबीर की सखियां, उनके पद लोगों को कंठस्थ हैं, जिन्हें वे उनके अवसरों पर उदाहरण स्वरूप प्रस्तुत करते है। कबीर को जो लोकप्रियता प्राप्त हुई उसका मूल कारण यह है कि उनके काव्य में अनुभूति की सच्चाई और अभिव्यक्ति का खरापन है। उन्हंे जो अच्छा लगा उसका खुलकर समर्थन किया और जो उन्हें बुरा लगा इसका विरोध उन्होंने निर्भिकता से किया। उनका यह खरा स्वभाव लोगों को पंसद आया और इसलिए वे जनता के कंठहार बन गए। अभी कुछ समय से कवियों एवं साहित्यकारों की प्रांसगिकता का प्रश्न उठाया जाने लगा है। महान कवियों एवं साहित्यकारों के सम्बन्ध में इस प्रश्न को उठाने की आवश्यकता नहीं है। काव्य रूप, शैली, भाषा-रूप बदल जाते हैं परन्तु महान कवियों के काव्य का कथ्य-वण्र्य जिन तथ्यों, समस्याओं एवं सत्य का दर्शन कराता है, उनकी प्रांसगिकता कभी समाप्त नहीं होती क्योंकि वे सत्य मानव जीवन के मूलभूत सत्य होते हैं। क्या वाल्मीकि कभी अप्रांसगिक हो सकते हैं ? उन्होंने मानव के जिन आदर्शों का स्वप्न देखा है, उन्हें प्राप्त करने में अभी मनुष्य जाति को न जाने कितने युग लग जाऐगें।
Pages:357-363
How to cite this article:
रेणु "आधुनिक संदर्भ में कबीर की प्रासंगिकता : एक अध्ययन". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 357-363
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