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Advanced Educational Research

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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
हर्ष के प्रारम्भिक जीवन में पैतृक संस्कारों की भूमिका
Authors
डाॅ0 अशोक कुमार दुबे
Abstract
यह सौभाग्य का विषय है कि पुष्यभूतिवंश के यशस्वी राजा हर्ष के राज्यकाल के विषय में बाणभट्ट नामक संस्कृत साहित्य के उद्भट विद्वान ने, जो उसके राजदरबार का रत्न था, अपनी लेखनी चलाई है। हर्ष के प्रति उसकी अनुरक्ति थी। हर्ष के पूर्वजों के प्रति उसके हृदय में आस्था का भाव था। उसके वर्णन में मात्र चाटुकारिता नहीं दिखाई देती। वह दूरदर्शी था। उसने प्रकृति, समाज एवं राजनीति को अत्यन्त निकट से देखा था। सटीक उपमाओं द्वारा अभिव्यक्ति की अद्भुत क्षमता वाले बाण के वर्णन से हर्ष के पैतृक संस्कारों पर बहुमूल्य प्रकाश पड़ता है। ‘हर्षचरित’ के अतिरिक्त हर्ष के मधुबन (उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में), बांसखेड़ा (उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में) तथा सोनपत (हरियाणा के सोनपत जिले के सोनपत स्थान) से प्राप्त ताम्रपत्र और लेखों तथा नालन्दा (बिहार में गया के निकट) से प्राप्त मृण्मुद्रा लेख के अनुसार ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज श्री हर्ष, पिता प्रभाकरवर्द्धन एवं माँ यशोमती के सुयोग्य पुत्र थे। ज्येष्ठमास के कृष्णपक्ष की द्वादशी को कृत्तिका नक्षत्र में रात्रि के प्रारम्भ में हर्ष का जन्म हुआ। सी० वी० वैद्य तथा कुछ अन्य विद्वानों के अनुसार हर्ष का जन्म चार जून, सन् पाँच सौ नब्बे ई० को हुआ था । बाण के अनुसार हर्ष के जन्मोत्सव पर विविध मंगलाचार हुए थे। ब्राह्मणों ने वेदोच्चार किया। पुरोहित शान्तिजल लेकर उपस्थित हुए। वृद्ध सम्बन्धी एकत्रित हुए। कारागार से बन्दी मुक्त किए गए। यहाँ हर्ष के संस्कारों की झलक मिलती है जिसके अनुसार जन्म के समय से ही उसे ब्राह्मणों, कुलवृद्धों का आशीर्वाद यहाँ तक कि कृपा पाकर मुक्त किए गए बन्दी जनों की शुभकामनाएं प्राप्त हुई होंगी। इसी सन्दर्भ में बाण का यह उल्लेख विचारणीय है कि प्रसन्न हुए लोगों ने बनियों की दुकानें लूट ली।। वस्तुतः प्रसन्नता के वातावरण में भीड़ की मनोवृत्ति का यह एक सहज अंग है। डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल की धारणा है कि सम्भव है राज्य की ओर से बनियों की हानि को पूरा किया गया हो।
Pages:135-137
How to cite this article:
डाॅ0 अशोक कुमार दुबे "हर्ष के प्रारम्भिक जीवन में पैतृक संस्कारों की भूमिका". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 135-137
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