ARCHIVES
VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
श्रीमद्वल्लभाचार्य का भक्ति सिद्धान्त
Authors
डाॅ0 अशोक कुमार दुबे
Abstract
श्रीमद्वल्लभाचार्य उस विशाल कृष्ण चेतना के सम्वाहक हैं, जिसने धर्म-दर्शन और साहित्य के माध्यम से शताब्दियों तक जनमानस का संस्कार और शृंगार किया। इसमें कोई सन्देह नीं कि आचार्य वल्लभ सोलहवीं शताब्दी के भक्ति आन्दोलन के नायक थे। पुष्टिमार्ग के माध्यम से उन्होंने भारत के सुदूर प्रान्तों को भी भावनात्मक एकता के सूत्र में बांध दिया था। अपने मानवतावादी दृष्टिकोण और भावसम्पन्नता के कारण पुष्टिमार्ग ने असाधारण लोकप्रियता अर्जित की। सम्पूर्ण उत्तर भारत, गुजरात और राजस्थान में इसका व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ। पुष्टिमार्ग के आश्रय से मध्यकाल में प्रभूत साहित्य की भी रचना हुई। अष्टछाप के सभी कवि पुष्टिमार्ग में दी दीक्षित थे। इनमें से चार वल्लभाचार्य के शिष्य थे और चार उनके कनिष्ठ पुत्र विट्ठलनाथ जी के थे।
Pages:123-127
How to cite this article:
डाॅ0 अशोक कुमार दुबे "श्रीमद्वल्लभाचार्य का भक्ति सिद्धान्त". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 123-127
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.
