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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
कल्पना के सुकुमार कवि सुत्रिनंदन पंत की काव्य यात्रा के विविधि सोपान
Authors
रेणु
Abstract
कविवर पंत सुकोमल भावनाओं के कवि हैं। वे हिन्दी साहित्य में अपनी सौन्दर्य दृष्टि और सुकुमार उदात्त कल्पना के लिए प्रसिद्ध हैं। प्रकृति के साथ उनकी प्रगाढ़ता शैषवावस्था से हुई है फलस्वरूप उन्होनें प्रकृति के अनेक रूपों की कल्पना की तथा उनके सौन्दर्यमयी चित्र अंकित किए हैं। कहीं वे प्रकृति के कोमल रूप का वर्णन करते हैं तो कहीं उग्र रूप का। परन्तु उन्होंने प्रकृति के मनोरम रूप का ही वर्णन किया है। कुछ स्थलों पर वे प्रकृति का नारी के रूप में कल्पना करके पाठक को मंत्र मुग्ध कर देते हैं। कविवर पंत हिन्दी के उन कवियों में से एक हैं जिनकी कविता का स्वर समय के साथ-साथ बदलता रहा है। उनकी प्रारम्भिक कविताएँ छायावादी कविताएँ थी परन्तु बाद में उनकी कविता ने प्रगतिवाद का रास्ता पकड़ लिया। उनके कारण विकास का तीसरा चरण अन्तश्चेतनावादी युग के रूप में सामने आया जिसमें उनकी कविता अरविन्द दर्शन से प्रभावित रही है। पन्त के काव्य विकास का अन्तिम चरण नव-मानवतावादी युग के रूप में जाना जाता है जिसमें कवि ने नव-मानवता का सन्देश सुनाया है।
Pages:48-51
How to cite this article:
रेणु "कल्पना के सुकुमार कवि सुत्रिनंदन पंत की काव्य यात्रा के विविधि सोपान". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 48-51
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