ARCHIVES
VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
कबीर के काव्य में प्रेम-दर्शन का स्वरूप
Authors
ममता रानी
Abstract
कबीर के काव्रू की अन्र्तचेतना प्रेम-तत्व में ही निहित है। प्रेम-तत्व के जीवन के लोकिन और आध्यात्मिक सन्दर्र्भे में विविध आयाम देते हुए काव्य भी भाषा में अभिव्यक्त करना इन महान कवियाँ का लक्ष्य रहा है। हमारा मानना है कि कबीर की कविता के सभी पक्ष्ज्ञ किसी न किसी रूप में परीक्ष्ज्ञ रूप से जीवन में प्रेम-तत्व की ही प्रतिष्ठा करते हैं।
Download
Pages:378-379
How to cite this article:
ममता रानी "कबीर के काव्य में प्रेम-दर्शन का स्वरूप". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 378-379
Pdf, Certificate, Cover Page, Index Page, Editorial Page, Accept Letter
Please enter the email address corresponding to this article submission.
