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International Journal of
Advanced Educational Research

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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
शांति शिक्षा का पाठयक्रम में एकीकरण
Authors
डाॅ. राखी गिरीराज धिंग्रा
Abstract
शांति शिक्षा को वर्तमान में शांति शिक्षा को व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा वैष्विक रूप से अपनाने की जरूरत आन पडी है। इन सभी क्षेत्रों में शांति को सम्मिलीत करना अति-आवश्यक हो गया है कारण इन सब का प्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन पर हो रहा है। जिस हेतू अनुसंधानकर्ता के अनुसार शिक्षा के माध्यम से शांति शिक्षा को शिक्षा में एकीकरण करने से कई प्रकार की समस्याओं को आसानी से हल किया जा सकता है। जैसे विद्यार्थी में बढती हिंसा, अनुशासन की कमी, तनाव, आत्महत्या जैसी गंभीर समस्या को अधिक आसानी से हल किया जा सकता है। जिस हेतु शिक्षा में शांति शिक्षा को प्रमुख 6 तरीकों से आत्मसाद अर्थात एकीकरण करने से इसके नतीजे अधिक समारात्मक हो सकते है। विद्यार्थीयों को शांति शिक्षा हेतु आवश्यक ज्ञान के प्रति जागरूक कर उस ज्ञान को व्यवहार में ढालने हेतू आवश्यक कौशलों का भी प्रशिक्षण दें उनमें समारात्मक बदल लाया जा सकता है। शांति शिक्षा यह कभी ना खत्म होने वाली प्रक्रिया है जिसे विद्यार्थीयों को शिक्षा के माध्यम से अधिक बेहतर तरीकों से दिया जा सकता है कारण शांति शिक्षा यह मानवता की शिक्षा देने वाली शिक्षा है। शांतमय जीवन जीने वाले व्यक्ति का निर्माण करना“ ही शांति शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य है। इस हेतु शांति शिक्षा को पाठयक्रम में 6 प्रमुख माध्यम के द्वारा आसानी से जोड़ा जा सकता हैं। प्रस्तुत लेख में शांति शिक्षा को किस प्रकार से पाठयक्रम में आसानी से जोड़ा जा सकता हैं इसे स्पष्ट किया गया हैं तथा शांति शिक्षा को किस प्रकार से पाठयक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए इसपर सविस्तर से चर्चा की गई है।
Pages:82-87
How to cite this article:
डाॅ. राखी गिरीराज धिंग्रा "शांति शिक्षा का पाठयक्रम में एकीकरण". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 82-87
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