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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
''कविता क्या है'': समकालीन कविता का परिपे्रक्ष्य-विजय रंजन
Authors
डाॅ0 नीतू शर्मा
Abstract
काव्य मानव मन के भीतर स्नेह, माधुर्य और बौद्धिकता का विकास करके उसे सौन्दर्य-दृष्टि देता है। काव्य अपनी परिसीमा में जितना व्यापक है उतना ही सूक्ष्म है। काव्य का अस्तित्व जीवन से जुड़ा है और इसीलिए यह जीवन की भंगिमाओं की तरह विशालएवं बहुआयामी है। भारतीय साहित्य में कोई ‘वाक्यं रसात्मकं काव्यं कहता है तो कोई ’उक्ति का वैचिन्न्य’ मानता है। कोई ‘रमणीयार्थ प्रतिपाद शब्द’ कहता है तो कोई ‘कल्पना प्रसूत बताता है। काव्य वस्तुतः हृदय से सबसे अधिक सम्बन्धित है। अर्थात अपने मूल रूप में अनुभूति की ही वस्तु है। जिसने हृदय पक्ष का स्पर्श प्राप्त कर लिया वही सच्चा कवि बन गया।
Pages:478-480
How to cite this article:
डाॅ0 नीतू शर्मा "''कविता क्या है'': समकालीन कविता का परिपे्रक्ष्य-विजय रंजन". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 478-480
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