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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
‘गोदान’ की धनिया : एक अवलोकन
Authors
डाॅ0 पूनम काजल
Abstract
हिन्दी कथा-साहित्य की परम्परा में मुंशी प्रेमचन्द की भूमिका युगान्तरकारी रही है। उन्होंने अपने उपन्यासों में दलित, शोषित और उत्पीड़ित मनुष्यता की व्यथा-कथा को पूरे नैतिक बल के साथ सशक्त अभिव्यक्ति दी है। गरीब, किसान, मजदूर और नारी-प्रेमचन्द की गहन् मानवीय संवेदना के प्रमुख आकर्षण रहे हैं। उनका उपन्यास ‘गोदान’ कृषक संस्कृति का ऐसा महाकाव्य है जिसमें भारतीय किसान की त्रासद स्थितियों के साथ-साथ तत्कालीन युग की अनेक सामाजिक जटिलताओं का भी बखूबी उद्घाटन किया गया है। जितनी शिद्दत के साथ उन्होंने तत्कालीन समाज की विद्रूपताओं को दर्शाया है, उतनी ही सूक्ष्म दृष्टि से नारी की व्यथा व संघर्ष को भी वाणी प्रदान की है। अपने इस उपन्यास में उन्होंने नारी को सीमित क्षेत्र की सीमाओं से निकाल कर अधिक विस्तृत भावभूमि पर खड़ा किया है।
Pages:377-378
How to cite this article:
डाॅ0 पूनम काजल "‘गोदान’ की धनिया : एक अवलोकन". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 377-378
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