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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
सल्तनत काल में स्त्रियों की स्थिति का अध्ययन
Authors
डाॅ0 आनन्द कुमार
Abstract
जब से सृष्टि बनी है तब से स्त्री और पुरुष इसका अहम अंग रहे हैं। मनुष्य के क्रमिक विकास में अनेक उतार-चढ़ाव आए हैं। कंदराओं से निकलने के बाद सामाजिक रूप से रहने तक के क्रम में पुरुष और स्त्री की स्थिति में अनेकानेक परिवर्तन हुए। वैदिक काल से वर्तमान काल तक स्त्रीयों की स्थिति, उनकी सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक अधिकारों में बहुत उतार-चढ़ाव रहे हैं। यूनान में स्त्रियों का दर्जा शाक-भाजियों के बराबर था। डाॅ. सम्पूर्णानन्द के अनुसार भारत में स्त्रियों की स्थिति ऐसी कभी नहीं रही कि भारतीयों को इस विषय को लेकर लज्जित होना पड़े। इसके विपरीत अन्य बहुत से देशों में नारियों की स्थिति बड़ी दयनीय रही हैं वैदिक काल से लेकर अब तक भारतीय नारी की स्थिति में बड़े उतार-चढ़ाव आए हैं। स्त्रीयों के जीवन के इन उतार-चढ़ाव भरे समय की सल्तनत काल में क्या स्थिति रही थी इसको इस शोध-पत्र में दिखाने का प्रयास करेंगे।
Pages:390-392
How to cite this article:
डाॅ0 आनन्द कुमार "सल्तनत काल में स्त्रियों की स्थिति का अध्ययन". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 390-392
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