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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
साहित्य का मुगल शासको के शासनकाल में विकास
Authors
डाॅ0 केशरी नंदन मिश्र
Abstract
मुगलों की राजभाषा फारसी थी अधिकांश साहित्य इसी भाषा में लिखे गये। यद्यपि बाबर की आत्मकथा तुर्की भाषा में लिखी गयी जो कि मुगल साहित्य पर उपलब्ध प्रमुख पुस्तक है। बाबरनामा/तुजुके बाबरी/बाकयाते बाबरी- बाबर की यह आत्मकथा तुर्की भाषा में लिखी गई। जिसमें उसके 1504-1529 तक का इतिहास है। बाबर भारत की आबोहवा की प्रशंसा करता है परन्तु यहाँ के लोगोें की आलोचना करता है। इस पुस्तक की महत्ता के कारण:-
अकबर के समय में अब्दुर्रहीम खानखाना ने इसका फारसी भाषा में अनुवाद किया।1826 में लीडन एवं एर्सकिन ने फारसी से अंग्रेजी में अनुवाद किया।1905 में मिस्टर बेवरिज ने मूल तुर्की से इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया।
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Pages:317-319
How to cite this article:
डाॅ0 केशरी नंदन मिश्र "साहित्य का मुगल शासको के शासनकाल में विकास". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 317-319
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