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VOL. 2, ISSUE 5 (2017)
भारत में सूखे की भौगोलिक विवेचना
Authors
अंकित सिंह
Abstract
भारत का उपमहाद्वीपीय आयाम, भौगोलिक स्थिति और मानूसन का स्वरूप, भारत को सर्वाधिक खतरा-प्रवण देशों की पंक्ति में ला खड़ा करता है। भारत की अवस्थिति सूखे, बाढ़, चक्रवातों और भूकम्पीय घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। भारत एक ऐसा देश है, जहाँ सूखा पड़ने का लंबा इतिहास रहा है। वर्ष 1801 से लेकर 2017 तक देश में 45 बार गंभीर सूखा पड़ा है। हाल के कुछ वर्षों में कमजोर मानसून का असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है और बारिश की कमी से फसल की हानि, सूखे का सबसे आम रूप है जो हमारे आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक क्षेत्र को कमजोर करता है। सूखे के कारण मवेशियों की भी हानि होती है। इस कारण सूखे से बचाव के लिये इस पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।
Pages:405-406
How to cite this article:
अंकित सिंह "भारत में सूखे की भौगोलिक विवेचना". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 2, Issue 5, 2017, Pages 405-406
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