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VOL. 2, ISSUE 4 (2017)
इलाहाबाद जनपद में कृषि परक संस्कृति का विकास: अधिवास प्रक्रिया एवं जीवन के विषेष सन्दर्भ में
Authors
देवेन्द्र प्रताप मिश्र
Abstract
कृषि एवं कृषक समाज प्राचीन काल से ही भारतीय अर्थव्यवस्था के केन्द्रबिन्दु रहे हैं। कृषि के उद्भव एवं विकास के पूर्व जब मनुष्य आखेटक और अन्न संग्राहक के रूप में जीवन यापन कर रहा था, तभी सांस्कृतिक गतिविधियां भी प्रारम्भ हो चुकी थी तथापि सभ्यता का उन्मेष कृषि जनित अधिषेष उत्पादन के उपरान्त ही सम्भव हो सका। मेरे अध्ययन का विषय मध्य गंगा के मैदान में स्थित विशेषतः पूर्वी उत्तर प्रदेष में कृषि परक संस्कृति का विकास इसमें भी संस्कृति विशेष-‘‘ अधिवास प्रक्रिया और जीवन है।’’ अधुनातन नवीनतम अनुसंधानों से जो तथ्य प्रकाश में आये हैं, मध्य गंगा घाटी ही नहीं अपितु सम्पूर्ण भारतीय इतिहास की न केवल प्रागैतिहासिक संस्कृति अपितु आद्यैतिहासिक एवं इतिहास के क्षेत्र में नये महत्वपूर्ण आयाम जुड़े हैं, चाहे वह लोहे की प्राचीनता से सम्बन्धित नवीन तथ्य हों अथवा प्रथम कृषि प्रयोक्ता संस्कृति से सम्बन्धित प्रमाण हो, सभी क्षेत्रों में प्राप्त नवीनतम साक्ष्यों के सन्दर्भ में पुनः गहन विचार की आवश्यकता है, क्योंकि जहाँ पर पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में मध्य पाषाण कालीन संस्कृति के स्थल प्रकाश में आये थे किन्तु नवपाषाण कालीन संस्कृति के स्थलों का न मिलना अनेक सवालों को जन्म देता था, लेकिन अब इन अनुत्तरित प्रश्नों का हल झूंसी, लहुरादेवा, मलहर, राजानल का टीला आदि स्थलों के उत्खनन से सहजमेव मिल गया है। इन स्थलों से लोहे की प्राचीनता तथा नवपाषाण कालीन जमावों से सम्बन्धित अनेक महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हुए है जिनसे लोहे की प्राचीनता को जहाँ पर 1800 B.C. तक सहजमेव ले जाया जा सकता है वहीं पर नवपाषाण कालीन संस्कृति के इन स्थलों से कृषि जनित महत्वपूर्ण साक्ष्यों के मिलने से प्रथम कृषक संस्कृति को 8000 B.C. तक निर्विवाद रूप से ले जाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि उपरोक्त सभी स्थल पूर्वी उत्तर प्रदेश में आते हैं।
Pages:172-174
How to cite this article:
देवेन्द्र प्रताप मिश्र "इलाहाबाद जनपद में कृषि परक संस्कृति का विकास: अधिवास प्रक्रिया एवं जीवन के विषेष सन्दर्भ में". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 2, Issue 4, 2017, Pages 172-174
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