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International Journal of
Advanced Educational Research

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VOL. 2, ISSUE 4 (2017)
विद्यापति का वैभव
Authors
डाॅ0 जयराम त्रिपाठी
Abstract
हिन्दी के अन्य अनेक मूर्धन्य महाकवियों की परिपाटी का अनुसरण करते हुए विद्यापति ने भी अपने जीवन परिचय से संबंधित कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं दिया है। यह माना जाता है कि इनका जन्म सन् 1360 के आसपास हुआ होगा क्योंकि इनके पिता गणपति ठाकुर राजा गणेश्वर के सभासद थे। उन्हीं के समय से इनके जन्म का तारतम्य स्थापित किया जाता है। विद्यापति का रचनाकाल आदिकाल एवं भक्तिकाल के संधिकाल में आता है। उनका जन्म एक संपन्न मैथिल ब्रह्मण परिवार में हुआ था। और यह परंपरागत रुप से विद्वान परिवार था। इनका अधिकांश जीवनकाल राज्याश्रय में ही व्यतीत हुआ। राजा महाराजाओं के आश्रय में जो भी काव्य रचना हुई उसकी मुख्य प्रवृŸिा शृंगार और वीर रस की थी।
Pages:138-139
How to cite this article:
डाॅ0 जयराम त्रिपाठी "विद्यापति का वैभव". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 2, Issue 4, 2017, Pages 138-139
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