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VOL. 2, ISSUE 3 (2017)
योग साधना में ब्रह्मचर्य का महत्त्व
Authors
सन्तोष
Abstract
सभी सुखों को प्राप्त करने के लिए हमें यह जीवन मिला है और जीवन का मुख्य उद्देश्य प्राणों की रक्षा करते मोक्ष को प्राप्त करना है। भारत भूमि ऋषियों-महर्षियों की भूमि रही है, यहां पर समय-2 पर योगियों ने साधना द्वारा आत्मज्ञान प्राप्त किया, जो जीवन का मुख्य उद्देश्य है, योग साधना के लिए ब्रह्मचर्य का बड़ा महत्त्व बताया गया है। योग साधना का अर्थ है कोई भी आध्यात्मिक अभ्यास करना है जिससे साधक परमात्मा प्राप्ति के अन्तिम लक्ष्य तक पहुँच सके। इसके लिए ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है। उपनिषदों में ब्रह्मचर्य की उत्पत्ति परब्रह्म यानि विराट पुरुष से मानी गई है जो सृष्टि का मूल है। आज का समाज इतना गिर चुका है कि आज योग साधना के नाम पर ढोंग किए जा रहे हैं जो बहुत ही घिनोना कार्य है, योग साधना का पहला कदम ही ब्रह्मचर्य पालन है, जो आज का साधु समाज भी इसको भूल चुका है जो विद्वान पुरुष ब्रह्मचर्य का पालन करता हुआ, दोषों का निराकरण करता हुआ सद्गुणों द्वारा निरीक्षण करता हुआ मोक्ष को प्राप्त करता है।
Pages:192-194
How to cite this article:
सन्तोष "योग साधना में ब्रह्मचर्य का महत्त्व". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 2, Issue 3, 2017, Pages 192-194
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