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VOL. 2, ISSUE 3 (2017)
ध्वनिकार के पूर्ववर्ती आचार्य : रूद्रट्
Authors
डाॅ0 पूनम राय
Abstract
साहित्य-शास्त्र में जितनी कृतियाँ उपलब्ध हैं उनमें भरतकृत नाट्यशास्त्र प्राचीनतम है। नाम्ना यद्यपि यह नाट्यशास्त्र सम्बन्धी विषयों का ही ग्रन्थ प्रतीत होता है, किन्तु यह विविध कलाओं का आकार ग्रन्थ है। इतिहास में इस ग्रन्थ को इतना महत्व प्राप्त हुआ कि इसकी महिमा के प्रकाश में सजातीय ग्रन्थों की खद्योतमाला ऐसी निष्प्रभ हो गई कि काल की गति उन्हें सर्वथा विस्मृति के गर्त में धकेल गयी।
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Pages:158-159
How to cite this article:
डाॅ0 पूनम राय "ध्वनिकार के पूर्ववर्ती आचार्य : रूद्रट्". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 2, Issue 3, 2017, Pages 158-159
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