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VOL. 2, ISSUE 3 (2017)
चीन पाकिस्तान की जुगलबन्दी के बीच भारत
Authors
प्रदीप कुमार
Abstract
अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में राष्ट्रों की पारस्परिक अर्न्तनिर्भरता वह सच्चाई है जिससे कोई देश बच नही सकता। आज विश्व के सभी देश अपने-अपने राष्ट्रीय हितों की प्राप्ति व उनमें सम्वर्द्धन के लिए प्रयासरत है। प्रत्येक देश अपने राष्ट्रीय हितों की पूर्ति के लिए विदेश सम्बन्धों में स्वतन्त्र विदेश नीति का प्रयोग करता है। प्राय: सभी राष्ट्र अपने राष्ट्रीय हितों की अधिकाधिक पूर्ति व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति और भूमिका में सम्मानजनक स्थान पाने के लिए विभिन्न राष्ट्रों से अपने द्विपक्षीय सम्बन्ध प्रगाढ़ करने की चेष्टा करते हैं। किसी देश की विदेश नीति या द्विपक्षीय सम्बन्ध, अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए और अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों के वातावरण में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा चुनी गई स्वहितकारी रणनीतियों का समूह होती है। एक देश के पर राष्ट्र से सम्बन्ध बहुत से कारकों पर निर्भर करते हैं। भारत के पर राष्ट्रों से सम्बन्ध उन अनेक तथ्यों को समेटे हुए है, जो कभी भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन से उपजे थे, शान्तिपूर्ण सह अस्तित्व व विश्व शान्ति का विचार हजारों वर्ष पुराने उस चिन्तन का परिणाम है, जिसे महात्मा बुद्ध व महात्मा गाँधी जैसे विचारकों ने प्रस्तुत किया था। इसी तरह भारत की विदेश नीति में उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद व रंगभेद की नीति का विरोध महान राष्ट्रीय आन्दोलन की उपज है। इन्हीं आदर्शों को भारत ने पर राष्ट्र सम्बन्धों का आधार बनाया है। इन्हीं मूल्यों को केन्द्र में रखकर भारत अपने से पड़ोसियों से सदैव मधुर सम्बन्धों का इच्छुक रहा है।
Pages:116-118
How to cite this article:
प्रदीप कुमार "चीन पाकिस्तान की जुगलबन्दी के बीच भारत". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 2, Issue 3, 2017, Pages 116-118
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