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VOL. 2, ISSUE 1 (2017)
निर्मल वर्मा के कथा साहित्य में आधुनिकता बोध
Authors
Birmati
Abstract
आधुनिक बोध जीवन के जटिल यथार्थ के अनेक स्तरों भाव स्थितियों, मनोदिशाओं और अनुभव खण्डों की एक समवेत संज्ञा हैं, जो गत्यात्मक और परिवर्तनशील है। यह एक तरह की संश्लिष्ट विचार पद्वति है। जिसका विकास कुछ अस्तित्ववादी दार्शनिकों और साहित्यकारों ने समकालीन विचार पद्वति के रूप में किया हैं। आधुनिकता ऐसी जीवन दृष्टि हैं जिसे हम जीवन साधन के रूप में प्रयोग करते हैं। आधुनिकता वर्तमान को सजग रूप से भोगने और उस भोग से नए सन्दर्भ में देखने और जीने की क्षमता है आज का व्यक्ति अपने आस-पास के अपने प्रश्नो से टकराता है, टूटता और निर्वासित हो रहा है क्योंकि वह वैज्ञानिक उपलब्धियों को जाने अनजाने स्वीकार कर रहा हैं और वैज्ञानिक विचारधारा ही आधुनिकता की धारणा बन गई हैं। अतः आधुनिकता ने वार्तालाप के दायरे को नितान्त सीमित और सकुचित कर दिया है। व्यक्ति अकेलपन से निकलने और परिवेश से जुडने के लिए छटपटा रहा है। वह जीने के लिए नये सम्बन्धों को नयी मान्यताओं की तलाश करता हैं ताकि अपनी खोई हुई दिशा को प्राप्त कर सके और जीवन को नये सम्बन्धों एवं सन्दर्भो से जोड सके। निर्मल वर्मा का कथा संसार इसी आधुनिकता-बोध की सशक्त अभिव्यक्ति है।
Pages:45-46
How to cite this article:
Birmati "निर्मल वर्मा के कथा साहित्य में आधुनिकता बोध". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 2, Issue 1, 2017, Pages 45-46
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