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VOL. 1, ISSUE 6 (2016)
रीवा जिले के माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का समीक्षात्मक अध्ययन
Authors
कल्पना मिश्रा
Abstract
बालकों में उत्पन्न होने वाले विकासात्मक परिवर्तनों के फलस्वरूप व्यक्तित्व के प्रतिमानों का भी विकास होता है। प्रतिमान का अर्थ स्वरूप या आकृति से होता है। इस प्रकार बालकांे के व्यक्तित्व संरचना मंे पायी जाने वाली विभिन्न मनोदैहिक प्रणालियाँ परस्पर अन्तः सम्बन्धित होती हैं और एक-दूसरे को आंतरिक रूप से प्रभावित करती रहती हैं। इस प्रकार व्यक्तित्व के संरूप में दो घटकों का समावेश होता है, जिन्हें क्रमशः ‘स्व’ की अवधारणा एवं शीलगुण के रूप में माना जाता है। प्रस्तुत शोध रीवा जिले के माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियांे के व्यक्तित्व विकास का समीक्षात्मक अध्ययन पर आधारित है। शोध के निष्कर्ष यह बताते है कि शोध क्षेत्र के उत्तरदाताओं का 49.67 प्रतिशत मत है कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के कार्यक्रमों के संचालन से व्यक्तित्व विकास होता है। बच्चों के प्रकृति-प्रदत्त गुणों को मुखारित करना, उनके नैतिक गुणों को पहचानना और संवारना, उन्हें सच्चे ईमानदार और उच्च आदर्शो के प्रति निष्ठावान नागरिक बनाना शिक्षक का ध्येय है।
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Pages:07-10
How to cite this article:
कल्पना मिश्रा "रीवा जिले के माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का समीक्षात्मक अध्ययन". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 1, Issue 6, 2016, Pages 07-10
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