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VOL. 1, ISSUE 5 (2016)
गुटनिरपेक्ष आन्दोलन का डरबन सम्मेलन
Authors
विनोद के0 चाहर
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के डरबन सम्मेलन की रूपरेखा को प्रस्तुत करता है तथा इस सम्मेलन में भारतीय कूटनीति द्वारा अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करते हुए विकासशील देशों के विभिन्न मुद्दों को किस प्रकार से रखा गया। यद्यपि भारतीय कूटनीतिज्ञों ने डरबन में गम्भीर बौद्धिक और कूटनीतिक प्रयास किया कि भारत अपने परमाणु परिक्षणों के कारण निन्दा का विषय न बने अतः अन्ततः परमाणु परीक्षणों पर भारत को किसी प्रकार की कड़ी आलोचना का शिकार नहीं होना पड़ा। यह सम्मेलन जब आयोजित हुआ तो वैश्विक स्तर पर अनेक परिवत्रन हो रहे थे शीत युद्ध की समाप्ति के साथ-साथ पूर्वी यूरोप के टूटने का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वह राष्ट्रीयताओं, जातियताओं एवं धार्मिक दृष्टिकोणों को कट्टरता की ओर ले जा रहा था। राष्ट्र-राज्य व्यवस्था का विघटन होता जा रहा था। जातीय, एथनिक तथा सांस्कृतिक टकराव बढ़ रहे थे।
Pages:54-58
How to cite this article:
विनोद के0 चाहर "गुटनिरपेक्ष आन्दोलन का डरबन सम्मेलन". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 1, Issue 5, 2016, Pages 54-58
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