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International Journal of
Advanced Educational Research

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VOL. 1, ISSUE 4 (2016)
रवीन्द्रनाथ टैगोर के शिक्षा दर्शन मूल्यों की उपादेयता का अध्ययन
Authors
कृष्ण बहादुर सिंह, डॉ0 जय सिंह
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र रवीन्द्रनाथ टैगोर के शिक्षा दर्शन मूल्यों की उपादेयता का अध्ययन पर आधारित है। रवीन्द्रनाथ बालकों का सर्वांगीण विकास चाहते थे, एक पक्षीय नहीं। इस संबंध में उन्हें प्राचीन भारतीय गुरुकुल प्रणाली का आदर्श सर्वथा मान्य था। उनके लिए बालकों के बौद्धिक और मानसिक पक्ष के समान ही शारीरिक, आत्मिक, आध्यात्मिक एवं चारित्रिक आदि पक्ष भी अत्यंत महत्वपूर्ण थे। बालको की वास्तविक उन्नति प्रकृति माता की गोद में ही संभव है। प्रकृति से एकरूपता स्थापित कर वे मानव तथा जीव मात्र से तादात्म्य स्थापित कर सकेंगे। शिक्षा के माध्यम के संबंध में टैगोर ने विदेशी भाषा के माध्यम को अस्वीकार किया है। विदेशी भाषा के माध्यम से शिक्षा विश्व के किसी भी सभ्य देश में नहीं प्रदान की जाती। इससे छात्रों का मन विकारग्रस्त हो जाता है और वे अपने ही देश में परदेशी के समान मालूम पड़ते है।
Pages:51-53
How to cite this article:
कृष्ण बहादुर सिंह, डॉ0 जय सिंह "रवीन्द्रनाथ टैगोर के शिक्षा दर्शन मूल्यों की उपादेयता का अध्ययन". International Journal of Advanced Educational Research, Vol 1, Issue 4, 2016, Pages 51-53
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